जनता
विशेष रिपोर्ट: युग न्यूज़ ब्यूरो रिपोर्ट
चित्रकूट (मध्य प्रदेश): कहते हैं कानून सबके लिए बराबर होता है, लेकिन जब कानून के रखवाले ही अपने विशेषाधिकार का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करने लगें, तो खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट से सामने आया है, जहां एक जज साहब के बंगले की बिजली गुल होने पर, कथित तौर पर पूरे शहर की बत्ती ही कटवा दी गई। भीषण गर्मी और उमस के बीच शहर की जनता रातभर तड़पती रही, लेकिन साहब का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

आंधी-तूफान के बाद 16 घंटे की मशक्कत, फिर आया ‘साहब’ का गुस्सा
मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान के कारण कई पेड़ और बिजली के पोल धराशायी हो गए थे, जिससे पूरे इलाके की बिजली ठप हो गई थी। बिजली विभाग के कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार 16 घंटे तक काम करते रहे और आखिरकार शाम को बिजली आपूर्ति बहाल करने में कामयाब रहे।
शाम को जैसे ही सप्लाई चालू हुई, कुछ ही देर बाद तकनीकी खराबी के कारण जज साहब के बंगले की लाइट फिर से चली गई। बस, फिर क्या था! आम जनता की समस्याओं पर भले ही सुनवाई में वक्त लगे, लेकिन साहब के बंगले की बत्ती गुल होते ही ‘न्याय’ तुरंत ऑन-द-स्पॉट होने पहुंच गया।
देर रात सब-स्टेशन पहुंचे जज साहब, कटवा दी पूरे फीडर की सप्लाई
बताया जा रहा है कि बंगले की बिजली कटने से नाराज जज साहब देर रात खुद बिजली विभाग के सब-स्टेशन पहुंच गए। वहां मौजूद कर्मचारियों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कथित तौर पर उनके निर्देश पर पूरे रजौला फीडर की ही बिजली बंद करवा दी गई।
सवाल यह उठता है कि अगर एक बंगले में तकनीकी खराबी थी, तो उसकी सजा पूरे शहर को क्यों दी गई? बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने साहब के रसूख और पद के आगे घुटने टेक दिए और पूरे शहर को अंधेरे के हवाले कर दिया।
रातभर तड़पते रहे बच्चे और बुजुर्ग, जनता में भारी आक्रोश
इस वीआईपी सनक का नतीजा यह हुआ कि चित्रकूट की जनता रातभर भीषण गर्मी और मच्छरों के साए में जागने को मजबूर रही। छोटे बच्चे, बीमार और बुजुर्ग पूरी रात सो नहीं सके। सुबह जब इस पूरी घटना की सच्चाई लोगों के सामने आई, तो स्थानीय जनता में बिजली विभाग और इस तानाशाही रवैये के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
युग न्यूज़ का सवाल: क्या संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को आम जनता को बंधक बनाने का अधिकार मिल जाता है? बिजली विभाग ने एक व्यक्ति के दबाव में आकर हजारों उपभोक्ताओं के हक पर डाका क्यों डाला? इस मनमानी पर उच्च अधिकारियों की चुप्पी भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

