रायपुर।अगर आप भी वीकेंड पर ढाबे या चमचमाते रेस्टोरेंट में बैठकर ‘शाही पनीर’ और ‘पनीर बटर मसाला’ के चटकारे ले रहे हैं, तो जरा ठहरिए! जिसे आप बड़े चाव से शुद्ध दूध का पनीर समझकर पेट में ढकेल रहे थे, उसमें से ज्यादातर दूध का नहीं, बल्कि पाम ऑयल, स्टार्च और केमिकल के घोल से बना ‘एनालॉग पनीर’ था!छत्तीसगढ़ में सेहत के इस बड़े सौदागरों पर सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है। राज्य सरकार और खाद्य सुरक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में एनालॉग (सिंथेटिक) पनीर के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह ‘फुल स्टॉप’ लगा दिया है।
आख़िर क्या होता है यह ‘एनालॉग पनीर’?
(सेहत का बड़ा ख़तरा)सुलगता सवाल यह है कि यह ‘एनालॉग पनीर’ बला क्या है? सीधे शब्दों में कहें तो यह बिना दूध का नक़ली पनीर है।
दूध की जगह पाम ऑयल: असली पनीर शुद्ध दूध को फाड़कर बनता है, जिसमें दूध का नैचुरल फैट (Milk Fat) और प्रोटीन (Casein) होता है। लेकिन एनालॉग पनीर में दूध का फैट पूरी तरह गायब रहता है। इसकी जगह घटिया पाम ऑयल या हाइड्रोजनेटेड वनस्पति तेल का इस्तेमाल किया जाता है।
केमिकल और स्टार्च का लोचा:
तेल, पानी और सोया प्रोटीन को आपस में चिपकाने और पनीर जैसा सख्त रूप देने के लिए इसमें इमल्सीफायर, स्टार्च (आटा/मैदा) और स्टेबलाइजर्स मिलाए जाते हैं। सस्ता और टिकाऊ ज़हर: असली पनीर जहाँ 350-400 रुपये किलो बनता है, वहीं यह केमिकल वाला पनीर महज 100 से 150 रुपये किलो में तैयार हो जाता है। यह हफ़्तों तक खराब नहीं होता और पकाने पर आसानी से पिघलता भी नहीं—इसीलिए होटल और ढाबे वाले अपनी बचत के चक्कर में आपकी सेहत की बलि चढ़ा रहे थे।
बीरगांव की फैक्ट्री में खुला था ‘ज़हर का डिपो’
कहते हैं न कि पाप का घड़ा एक दिन भरता जरूर है। हाल ही में राजधानी रायपुर के बीरगांव इलाके में जब खाद्य विभाग की टीम ने एक गुप्त सूचना पर रेड मारी, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। वहां दूध का एक कतरा भी नहीं था, लेकिन पाम ऑयल, सोया प्रोटीन और रसायनों की बदौलत टनों के हिसाब से चमचमाता ‘नकली पनीर’ तैयार हो रहा था।यही केमिकल वाला पनीर शहर के नामी-गिरामी ढाबों, पिज्जा सेंटर्स और रोल के ठेलों पर बेधड़क सप्लाई हो रहा था, जिससे आपकी-हमारी जेब भी काटी जा रही थी और सेहत के साथ खिलवाड़ भी हो रहा था।स्वास्थ्य मंत्री का कड़ा संदेश: “अब सीधे जेल जाएंगे मिलावटखोर!”मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। कड़े शब्दों में साफ कर दिया गया है कि—
छत्तीसगढ़ की जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। जो भी होटल, ढाबा या व्यापारी एनालॉग पनीर बेचते या परोसते पाया गया, उसका लाइसेंस तो तुरंत रद्द होगा ही, साथ ही सलाखों के पीछे की हवा भी खानी पड़ेगी।
जनता सावधान! असली-नकली का ऐसे करें ‘पोस्टमार्टम’सरकार ने तो अपना हंटर चला दिया है, लेकिन आपको भी चौकन्ना रहने की जरूरत है। अगली बार बाहर पनीर खाने या खरीदने से पहले इन 2 आसान ट्रिक्स को याद रखें:1. रबड़ टेस्ट: पनीर के टुकड़े को हथेली से मलिए। अगर वह आसानी से दानेदार होकर टूट जाए तो शुद्ध है। अगर रबड़ की तरह खिंचे, चिपचिपा हो जाए या हथेली में तेल छोड़ दे, तो समझ जाइए कि यह पाम ऑयल का खेल है!2. आयोडीन/बीटाडिन टेस्ट: पनीर को पानी में उबालकर ठंडा करें और उस पर घर में रखी बीटाडिन (Iodine) की दो बूंदें डालें। अगर पनीर का रंग नीला पड़ जाए, तो मतलब साफ है—उसमें स्टार्च भरा हुआ है।छत्तीसगढ़ में अब मिलावटखोरों की खैर नहीं! अगर आपको कहीं भी नकली या एनालॉग पनीर की भनक लगे, तो तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें।

