नई दिल्ली:जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब सीधे देश की सबसे बड़ी कानूनी दहलीज पर पहुंच चुका है! लद्दाख की आवाज और मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं।
अन्न के एक-एक दाने का त्याग कर चुके वांगचुक की सेहत अब इस कदर बिगड़ चुकी है कि मामला कोर्ट में पहुंच गया और दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर बेहद सख्त और अर्जेंट सुनवाई की है! चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने इस पूरे मामले की गंभीरता (Urgency) को देखते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर कल (16 जुलाई) तक ही अपना जवाब दाखिल करने का अल्टीमेटम दे दिया है!
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा— मामला बेहद गंभीर है और इस पर तुरंत कदम उठाने की जरूरत है! 🔥 8 किलो से ज्यादा वजन गिरा, ‘फोर्स-फीडिंग’ की मांग से मचा हड़कंप!याचिकाकर्ता वकील राकेश कुमार सैनी ने हाईकोर्ट में जो दलीलें दी हैं, उसने सबको चौंका दिया है। याचिका में कहा गया है कि पिछले 18 दिनों में सोनम वांगचुक का वजन 8 किलो से ज्यादा घट चुका है और उनका ब्लड शुगर लेवल खतरनाक स्तर तक नीचे जा रहा है!
याचिका में कोर्ट से बेहद चौंकाने वाली और बड़ी मांग की गई है:अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग:
वांगचुक को तुरंत किसी बड़े सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किया जाए।जबरन खाना (Force-Feeding) खिलाया जाए: अगर देश के इस जागरूक नागरिक की जान बचानी है, तो मेडिकल सुपरविजन में लिक्विड डाइट और जरूरी न्यूट्रिएंट्स देकर उन्हें जबरन (चाहे उनकी मर्जी के खिलाफ ही क्यों न हो) खाना दिया जाए, ताकि कोई अनहोनी न हो।
“क्या देश का विवेक मर चुका है?”कोर्ट में याचिकाकर्ता ने बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि, “एक नागरिक पूरे देश के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए अपनी जान दांव पर लगा रहा है। सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं। अगर वांगचुक को कुछ हुआ तो यह पूरे देश के लिए शर्म की बात होगी। भले ही सिस्टम का विवेक मर चुका हो, लेकिन हमें भरोसा है कि अदालतों का विवेक अभी जिंदा है!”
❓ आखिर क्यों जल रही है विरोध की ये आग?
आपको बता दें कि सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले युवाओं के साथ आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग NEET पेपर लीक और देश की परीक्षा व्यवस्था में हुई धांधलियों को लेकर है, जिसके खिलाफ वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि कल जब कोर्ट की टेबल पर केंद्र और दिल्ली सरकार अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे, तो इस महा-आंदोलन का रुख क्या मोड़ लेता है!
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