रायपुर, 1 मई 2026
छत्तीसगढ़ शासन के “सही दवा-शुद्ध आहारः यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत आज रायपुर के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी के निर्देश पर औषधि प्रकोष्ठ की टीम ने शहर के 13 प्रमुख अस्पतालों और उनसे जुड़ी फार्मेसियों का औचक निरीक्षण किया।
अभियान का पांचवा दिन और सघन जांच
27 अप्रैल से 11 मई 2026 तक चलने वाले इस 15 दिवसीय विशेष अभियान के पांचवें दिन प्रशासन ने अपनी सक्रियता बढ़ाई। टीम ने अस्पतालों में दवाओं के रखरखाव, विशेषकर वैक्सीन स्टोरेज के लिए तापमान लॉग बुक, रेफ्रिजरेटर कैलिब्रेशन और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की बारीकी से जांच की।
इन प्रमुख अस्पतालों में हुई कार्रवाई:
निरीक्षण की जद में शहर के प्रतिष्ठित अस्पताल आए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
• बालाजी अस्पताल (दुबे कॉलोनी)
• आई.टी.एस.ए. अस्पताल (सड्डू)
• मोर अस्पताल और श्रीनय अस्पताल (देवेंद्र नगर)
• ब्लूबर्ड अस्पताल (अशोका रतन)
• श्री शिव शक्ति, दीवान और वैदेही अस्पताल (भाठागांव)
• लोटस अस्पताल (राजातालाब) और मधुमीत अस्पताल (अवंती विहार)
ओजेम्पिक जैसी दवाओं के रिकॉर्ड गायब, 3 दिन का अल्टीमेटम
निरीक्षण के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई। कुछ संस्थानों में GLP-1 वर्ग की औषधियां (जैसे ओजेम्पिक और वेगोवी) तो मिलीं, लेकिन उनके क्रय-विक्रय का कोई हिसाब-किताब मौके पर मौजूद नहीं था। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रतिष्ठानों को 3 दिनों के भीतर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) कार्यालय में दस्तावेज पेश करने का नोटिस दिया है।
साथ ही, नारकोटिक (NDPS) दवाओं के स्टॉक रजिस्टर में विसंगतियों और एक्सपायरी दवाओं के सही प्रबंधन न होने पर भी कड़ी फटकार लगाई गई है।





कलेक्टर का संदेश: आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। मिलावटी या अवैध दवाओं के कारोबार पर लगाम कसने के लिए यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। किसी भी चूक पर कानूनी तौर पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।

