रायपुर (बीरगांव): रायपुर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में है। मामला बीरगांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहाँ विभाग ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने नैतिकता और न्याय प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जून 2025 में बीरगांव स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव (डिलीवरी) के बाद एक महिला मरीज की मौत हो गई थी। जांच में पाया गया कि ड्यूटी पर तैनात डॉ. अंजना कुमार ने इलाज और निगरानी में भारी लापरवाही बरती थी।
• सरकारी स्वीकारोक्ति: शासन ने स्वयं माना था कि ड्यूटी में लापरवाही और उचित फॉलोअप की कमी के कारण यह दुखद घटना हुई।
• पूर्व कार्रवाई: दोषी पाए जाने के बाद डॉ. अंजना कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया था।

विवाद का कारण
हैरानी की बात यह है कि निलंबन की अवधि बीतने के बाद, स्वास्थ्य विभाग ने उसी डॉक्टर को वापस उसी अस्पताल (बीरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) में तैनात कर दिया है जहाँ यह घटना घटी थी।
जनता में आक्रोश
इस दोबारा पोस्टिंग की खबर के बाद स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार में भारी नाराजगी है। जब जून 2025 में यह घटना हुई थी, तब भी बड़े पैमाने पर बवाल हुआ था। अब विभाग के इस फैसले पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं:
1. क्या विभाग मरीजों की जान की सुरक्षा को लेकर गंभीर है?
2. जिस स्थान पर डॉक्टर की लापरवाही से जान गई, वहां उन्हें वापस भेजना क्या पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा नहीं है?
नोट: यह खबर प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है, जो प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है।

