छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही प्रदेश के सभी निजी अस्पतालों और लैब में जांच की दरें सरकारी दरों के समान तय की जाएंगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर इलाज के दौरान पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
योजना के मुख्य बिंदु:
- समान दरें: एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और ब्लड टेस्ट जैसी प्रमुख जांचों की कीमतें सरकारी और निजी अस्पतालों में एक समान होंगी।
- रेट लिस्ट अनिवार्य: सभी अस्पतालों को अपनी रेट लिस्ट सार्वजनिक रूप से चस्पा (Display) करनी होगी।
- सुविधा और पारदर्शिता: मरीजों को अब सरकारी अस्पतालों की भीड़ से राहत मिलेगी। वे अपने नजदीकी निजी लैब या अस्पताल में भी किफायती दरों पर जांच करा सकेंगे।
सरकारी बनाम निजी: जांच शुल्क का अंतर
वर्तमान में सरकारी और निजी संस्थानों के बीच जांच की कीमतों में जमीन-आसमान का फर्क है, जिसे सरकार कम करना चाहती है:

(नोट: सीटी स्कैन और एमआरआई के न्यूनतम रेट बीपीएल/आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए हैं।)
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
अक्सर देखा गया है कि सरकारी अस्पतालों में मशीनों के खराब होने या लंबी वेटिंग के कारण मरीजों को मजबूरी में निजी लैब जाना पड़ता है, जहाँ उनसे भारी शुल्क वसूला जाता है। सरकार अब ऐसी व्यवस्था बना रही है जिससे निजी लैब संचालक भी इस पहल का हिस्सा बनें और मरीजों को सही समय पर, सही दाम में रिपोर्ट मिल सके।
हम प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकारी सिस्टम को दुरुस्त करने के साथ ही निजी अस्पतालों में जांच दरों को नियंत्रित करने की तैयारी चल रही है।”
— श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री

