भिलाई/दुर्ग: जिला प्रशासन और पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दुर्ग जिले के सामोदा गांव में चल रहे अफीम के काले कारोबार का पर्दाफाश किया है। करीब साढ़े 9 एकड़ खेत में बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती की जा रही थी। इस मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर जमीन मालिक और भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को हिरासत में लिया गया है।
व्हाट्सएप पर बच्चों की फोटो से खुला राज
इस पूरे मामले का खुलासा बेहद फिल्मी तरीके से हुआ। होली के दिन गांव के बच्चों ने खेत में घुसकर कुछ फोटो खींची और उन्हें गांव के व्हाट्सएप ग्रुप में डाल दिया। जब गांव के सरपंच अरुण गौतम ने उन तस्वीरों को देखा, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने गूगल पर उन पौधों का मिलान किया, जिससे पुष्टि हुई कि वे अफीम के पौधे हैं। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
सुरक्षा के लिए तैनात थे बाउंसर, मक्का-पपीता के बीच छिपाई फसल
अफीम की इस अवैध खेती को छिपाने के लिए शातिराना तरीका अपनाया गया था:
• इंटरक्रॉपिंग: अफीम के पौधों को मक्का, पपीता और केला की फसलों के बीच लगाया गया था ताकि बाहर से देखने पर यह सामान्य खेती लगे।
• घेराबंदी: पूरे खेत के चारों ओर ऊंची बाउंड्री और गेट लगाए गए थे।
• निजी सुरक्षा: खेत की सुरक्षा के लिए बाउंसर तैनात किए गए थे ताकि कोई अनजान व्यक्ति अंदर न आ सके।
• बाहरी मजदूर: खेती के काम के लिए खंडवा (मप्र) और राजस्थान से विशेष मजदूर बुलाए गए थे।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह और एसपी सुखनंदन राठौर ने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने बताया कि:
1. जमीन प्रीति बाला और मधुमति ताम्रकार के नाम पर पंजीकृत है।
2. खेती का संचालन विनायक ताम्रकार, उनके भाई विमल और ब्रजेश ताम्रकार द्वारा किया जा रहा था।
3. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि तीन दिन पहले ही अफीम की एक बड़ी खेप (कंटेनर) कहीं भेजी जा चुकी है।
4. पुलिस ने दो राजस्थानी मजदूरों को भी हिरासत में लिया है।
कलेक्टर ने मांगी गिरदावरी रिपोर्ट
कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से पटवारी से खेत की गिरदावरी रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि सरकारी दस्तावेजों में इस खेत में किस फसल की जानकारी दर्ज कराई गई थी और क्या राजस्व अधिकारियों की इसमें कोई मिलीभगत है।

