सराईपाली (छत्तीसगढ़): स्थानीय रचनाकार पूर्णपावन ने अपनी स्वरचित कविता ‘छत्तीसगढ़ की महिमा’ के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध लोक-संस्कृति, पर्व-त्यौहारों की विविधता और माटी के गौरव को सुंदर शब्दों में अभिव्यक्त किया है।
रचनाकार ने छत्तीसगढ़ महतारी के प्रति सम्मान, ‘धान का कटोरा’ की पहचान और “छत्तीसगड़िया सबले बढ़िया” की भावना को रेखांकित करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की है।
पढ़ें पूरी कविता:
विषय: छत्तीसगढ़ की महिमा
छत्तीसगढ़ की महिमा और गाथा है अपरम्पार,
छत्तीसगढ़ को महतारी कहता पूरा संसार।
भिन्न भिन्न है लोग यहाँ,विभिन्न प्रकार की बोली।
कई प्रकार के त्यौहार यहाँ पर,मानो लगता है,
हो कोई रंगोली।
यूँ ही नहीं कहते हैं,छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा,
यहाँ की माटी को नमन कर,होता है हर साँझ और सवेरा।
आओ करें हम सभी,छत्तीसगढ़ का गान,
छत्तीसगढ़ की महिमा को,आओ हम सभी करें प्रणाम।
छत्तीसगड़िया सबले बढ़िया,कहते हुए हमें होता है,
बहुत गर्व और अभिमान।।
स्वरचित: पूर्णपावन (सराईपाली, छत्तीसगढ़)
रचनाकार की इस भावात्मक अभिव्यक्ति और माटी के प्रति समर्पण की स्थानीय पाठकों व साहित्य प्रेमियों ने खूब सराहना की है।
