सरायपाली के रचनाकार ‘पूर्णपावन’ ने कविता के जरिए बयां किया सावन का सौंदर्य, ‘सावन की बूंदें’ में दिखा प्रकृति और भक्ति का संगम

By Pallav shrivastav

सरायपाली (छत्तीसगढ़)। अंचल के रचनाकार ‘पूर्णपावन’ ने अपनी स्वरचित कविता ‘सावन की बूंदें’ के माध्यम से सावन मास के प्राकृतिक उल्लास और आध्यात्मिक भाव को बेहद सुंदर शब्दों में पिरोया है।रचनाकार ने कविता के माध्यम से दर्शाया है कि कैसे सावन की पहली फुहारें तपती धरती को तृप्त कर प्रकृति को नया यौवन देती हैं। साथ ही, उन्होंने झूले, कृष्ण की मुरली, राधा का प्रेम और चातक पक्षी के इंतजार को भी सहजता से उकेरा है।

प्रस्तुत है ‘पूर्णपावन’ की पूरी रचना:

विषय: सावन की बूंदें

विधा: कविता

सावन की बूंदें जब आती,

धरती की प्यास बुझाती हैं।

मानो इन बूंदों से,

हरियाली सी छा जाती है।

सावन की बूंदों से मानो,

फूलों की बगिया खिल जाती है।

सूखे घास, पात, डाली को जैसे यौवनता सी मिल जाती है।

सावन की बूंदें पड़ते ही, झूले भी लग जाते हैं।

इन झूलों में बैठ कृष्ण जी, मनभावन मुरली बजाते हैं।

इस मुरली की धुन में देखो,राधा भी खो जाती हैं।

टकटकी लगाए चातक भी करता है देखो,

इन बूंदों का इंतजार।

स्वाति नक्षत्र की सावन की बूंदों से ही, बुझती है इसकी प्यास।

सावन की बूंदों ने मानो इस धरती को,

हरी चुनरिया ओढ़ा दी।

हमें भी सराबोर कर दिया, और हरियाली लौटा दी।

स्वरचित: पूर्णपावन कृति, सरायपाली (छत्तीसगढ़)

इस सुंदर और भावपूर्ण काव्य रचना को साहित्य प्रेमियों और पाठकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है।

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