दुर्ग में अतिथि शिक्षकों का महा-आंदोलन: शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव; दिनभर उग्र प्रदर्शन के बाद सड़क पर गुजरी पूरी रात; संविलियन और समान वेतन पर अड़े!

By Pallav shrivastav

दुर्ग / रायपुर (युग न्यूज़ ब्यूरो):

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) का आक्रोश अब चरम पर पहुंच गया है।

अपनी दो सूत्रीय मांगों—संविलियन (नियमितीकरण) और समान कार्य के बदले समान वेतन को लेकर प्रदेशभर से आए सैकड़ों अतिथि शिक्षकों ने दुर्ग स्थित राज्य के शिक्षा मंत्री के निवास (बंगले) का घेराव कर दिया है।

दिनभर चले उग्र प्रदर्शन, प्रशासन से तीखी झड़प और घंटों की नारेबाजी के बावजूद जब शासन की ओर से कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया, तो आक्रोशित शिक्षकों ने बंगले के बाहर सड़क पर ही अपना डेरा जमा लिया और पूरी रात खुले आसमान के नीचे सड़क पर गुजारी।

💥 दिनभर भारी हंगामा:

बंगले के बाहर की ग्राउंड रिपोर्ट प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों शिक्षक: दुर्ग स्थित मंत्री बंगले के बाहर तड़के से ही प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अतिथि शिक्षकों का जुटना शुरू हो गया था। दोपहर होते-होते बंगले के बाहर सैकड़ों शिक्षकों और महिला अध्यापिकाओं का विशाल हुजूम जमा हो गया।

बैरिकेड्स पर तीखी धक्का-मुक्की:

सुरक्षा के लिहाज से पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने के लिए प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच जमकर झूमाझझट और धक्का-मुक्की हुई। शिक्षक मंत्री से सीधे मिलकर अपनी बात रखने पर अड़े रहे।सड़क पर रतजगा और चूल्हा: मांगें पूरी न होने पर शिक्षकों ने मंत्री बंगले के सामने ही सड़क पर बिछौना बिछा लिया।

भीषण गर्मी, धूल और असुविधाओं के बावजूद महिलाओं और पुरुष अध्यापकों ने पूरी रात सड़क पर ही बिताई। रातभर नारेबाजी और विरोध के स्वर गूंजते रहे।

📌 अतिथि शिक्षकों की क्या हैं मुख्य मांगें? (विस्तार से)पदों का संविलियन (Permanent Placement):शिक्षकों का कहना है कि वे बीते कई सालों से बेहद मामूली मानदेय पर दुर्गम क्षेत्रों और दूर-दराज के सरकारी स्कूलों में अध्यापन का कार्य कर रहे हैं। उन्हें तत्काल प्रभाव से शिक्षा विभाग में समायोजित कर नियमित (संविलियन) किया जाए।

समान काम, समान वेतन (Equal Pay for Equal Work):जब तक संविलियन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक नियमित शिक्षकों की तर्ज पर ही अतिथि शिक्षकों को भी समान कार्य का समान वेतनमान दिया जाए ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

सेवा सुरक्षा की गारंटी:हर शैक्षणिक सत्र के अंत में निकाले जाने के डर और मानसिक तनाव को खत्म करने के लिए सेवा सुरक्षा की नीति तुरंत लागू की जाए।

🚨 पुलिस बल की तैनाती, प्रशासन के छूटे पसीनेशिक्षा मंत्री के बंगले पर अचानक हुए इस बड़े घेराव से स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है:छावनी में तब्दील इलाका: मंत्री बंगले के 500 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस बल और महिला पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है।

अधिकारियों की समझाइश बेअसर:

जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने रात में पहुंचकर शिक्षकों को समझाने और धरना समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़ गए हैं कि “जब तक शिक्षा मंत्री खुद आकर उनसे बात नहीं करते और मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देते, वे बंगले के सामने से एक इंच भी नहीं हटेंगे।”

🌶️ युग न्यूज़ का बेबाक नजरिया:

‘भविष्य गढ़ने वाले खुद भविष्य के लिए सड़क पर’छत्तीसगढ़ के शासकीय स्कूलों में अध्यापन की मुख्य कमान संभालने वाले अतिथि शिक्षकों की यह दुर्दशा राज्य की शिक्षा नीतियों पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

जो शिक्षक नौनिहालों का भविष्य संवारते हैं, आज वे खुद अपने हक और सम्मान के लिए दुर्ग की सड़कों पर रात गुजारने को मजबूर हैं।

क्या शिक्षा मंत्री सड़क पर बैठे इन शिक्षकों की सुध लेंगे?

या फिर यह आंदोलन और अधिक उग्र होकर पूरी राजधानी रायपुर को अपने लपेटे में लेगा?

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