रायपुर। राजधानी रायपुर के पॉश और व्यस्त इलाकों में इन दिनों एक अजीबोगरीब और खतरनाक खेल चल रहा है। समता कॉलोनी, रायपुरा, फाफाडीह और गुढ़ियारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों के रिहायशी इलाकों के ठीक पीछे, खाली मैदानों और सड़कों के किनारे अचानक अजनबी चेहरों और सफेद-नीले तंबुओं की कतारें खड़ी हो गई हैं।
स्थानीय भाषा से बिल्कुल अनजान, दूर-दराज के राज्यों से आए इन लोगों ने शहर के दिल में अपना डेरा डाल लिया है। दावा है कि इनके पास हर मर्ज की ‘रामबाण’ दवा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रायपुर की जनता की सेहत और सुरक्षा के साथ हो रहे इस खुले खिलवाड़ पर जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर क्यों बैठे हैं?
📢 समता कॉलोनी से गुढ़ियारी तक लाउडस्पीकर का शोर, कांच के जार में बंद ‘खतरनाक खेल
‘पॉश इलाके समता कॉलोनी की गलियों से लेकर गुढ़ियारी के व्यस्त बाजारों और फाफाडीह-रायपुरा के रिहायशी क्षेत्रों तक, इन तंबुओं के बाहर चमकीले बैनर-पोस्टर टांग दिए गए हैं। ‘हिमालय की दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ’ और ‘हर बीमारी का जड़ से खात्मा’ जैसे बड़े-बड़े दावों के साथ भ्रामक लाउडस्पीकर बजाकर राहगीरों को फंसाया जा रहा है। कांच के बड़े-बड़े जार में सूखी जड़ें, छाल और अजीबोगरीब भस्म रखकर लोगों में अंधविश्वास और उत्सुकता का जाल बुना जा रहा है।
😡 जनता परेशान, पर ‘साहब’ एसी कमरों में मस्त: सीएमओ और प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह है कि रायपुर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग का अमला कर क्या रहा है?
शहर के बीचों-बीच बिना किसी ड्रग लाइसेंस, बिना किसी आयुर्वेदिक डिग्री (BAMS) और बिना किसी लैब टेस्टिंग के यह जानलेवा कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन मुख्य नगर पालिक अधिकारी (CMO) और प्रशासनिक अमला गहरी नींद में सोया हुआ है।स्थानीय निवासियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।
लोगों का कहना है कि:”अगर कोई स्थानीय छोटा व्यापारी दुकान के बाहर दो फीट ठेला बढ़ा दे, तो निगम का दस्ता डंडा लेकर पहुंच जाता है। लेकिन समता कॉलोनी और गुढ़ियारी जैसे इलाकों में बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) के, बिना किसी वैध अनुमति के पूरे के पूरे कुनबे तंबू तानकर रह रहे हैं और दवा के नाम पर ‘जहर’ बेच रहे हैं, तब सीएमओ साहब को कुछ दिखाई नहीं देता!”
🛑 बिना किसी जांच के बिक रहा ‘अमृत’, साइड इफेक्ट हुआ तो कौन जिम्मेदार?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि सड़क किनारे खुले में बिकने वाले इन तथाकथित मिश्रणों में भारी धातुएं (Heavy Metals) और प्रतिबंधित स्टेरॉयड मिलाए जाते हैं, जो चंद दिनों में इंसान के लीवर और किडनी को हमेशा के लिए डैमेज कर सकते हैं। बिना किसी पक्के बिल और स्थायी पते के बिकने वाली इन दवाओं को खाकर अगर किसी नागरिक को कुछ हो गया, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्योंकि ये घुमंतू लोग कुछ ही हफ्तों में अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर गायब हो जाएंगे।
❓ जनता का सीधा सवाल: कब टूटेगी प्रशासन की कुंभकर्णी नींद?फाफाडीह और रायपुरा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में घरों के ठीक पीछे इन अस्थायी ढेरों की वजह से मोहल्लों की प्राइवेसी और सुरक्षा भी दांव पर लगी है।
देर रात तक अज्ञात लोगों की आवाजाही से कॉलोनियों की महिलाएं और बच्चे डरे हुए हैं। रायपुर की जनता अब सीधे मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों से गुहार लगा रही है कि एसी कमरों में बैठे लापरवाह अधिकारियों को जगाया जाए और इन संदिग्ध दवाखानों की तुरंत पुलिस व स्वास्थ्य विभाग से जांच कराकर इन्हें शहर से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
आपकी आवाज: समता कॉलोनी, गुढ़ियारी, फाफाडीह और रायपुरा के हमारे पाठक इस लापरवाही पर क्या सोचते हैं? क्या आपके इलाके में भी ऐसे तंबू तन गए हैं? अपनी राय हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर कर प्रशासन को जगाएं!
