युग न्यूज एक्सक्लूसिव: लखनऊ हादसे के बाद भी नहीं जागा रायपुर प्रशासन? राजधानी में नियमों को ताक पर रख चल रहे हैं दर्जनों कोचिंग सेंटर

By Pallav shrivastav

रायपुर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में एक निजी बिल्डिंग में चल रहे कोचिंग सेंटर में भड़की आग ने 15 मासूमों की जान ले ली। इस दिल दहला देने वाले हादसे के बाद पूरे देश में हड़कंप है, लेकिन क्या छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने इससे कोई सबक लिया है?

‘युग न्यूज’ की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि रायपुर के कई प्रमुख इलाकों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाकर अवैध और ‘फेक’ (बिना मान्यता/बिना सुरक्षा) कोचिंग सेंटरों का जाल फैला हुआ है, जो कभी भी बड़े हादसे को न्यौता दे सकते हैं।

रायपुर के इन इलाकों में ‘मौत के कुएं’ जैसे हालात

रायपुर के कोटा (यूनिवर्सिटी रोड), अनुपम नगर, मोवा, समता कॉलोनी और सुंदर नगर चंगोराभाठा,रायपुरा जैसे क्षेत्रों में सैकड़ों कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी और ट्यूशन क्लासेस संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश: सकती और तंग गलियों में: रिहायशी मकानों को बिना डायवर्शन कराए कोचिंग हब में बदल दिया गया है, जहाँ फायर ब्रिगेड की गाड़ी का घुसना भी नामुमकिन है।

सिंगल एग्जिट (एक ही रास्ता): तीन-चार मंजिला इमारतों में ऊपर जाने और नीचे आने के लिए सिर्फ एक पतली सी सीढ़ी है। अगर वहाँ शॉर्ट सर्किट हुआ, तो बच्चों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। फायर एनओसी का अता-पता नहीं: बेसमेंट से लेकर छत तक ठसाठस भरे क्लासरूम्स में न तो फायर एक्स्टिंग्विशर (आग बुझाने के सिलेंडर) काम कर रहे हैं और न ही उनके पास दमकल विभाग की एनओसी है।

अंधेरे में भविष्य: सिर्फ कागजों पर या ‘फेक’ तरीके से चल रहे संस्थानकई संस्थान सिर्फ बड़े-बड़े होर्डिंग्स और भ्रामक विज्ञापनों के दम पर चल रहे हैं। न तो उनके पास नगर निगम का वैध व्यावसायिक लाइसेंस है और न ही वे किसी सुरक्षा ऑडिट के दायरे में आते हैं।

लखनऊ में भी नीचे पेट शॉप और ऊपर कोचिंग चल रही थी;

रायपुर में भी कई जगह नीचे वेल्डिंग की दुकानें, रेस्टोरेंट या कबाड़ के गोदाम हैं और उनके ठीक ऊपर सैकड़ों बच्चे बैठकर पढ़ रहे हैं।’

युग न्यूज’ के तीखे सवाल: क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

1. रायपुर नगर निगम और जिला प्रशासन कड़े रुख के साथ इन कोचिंग संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कब शुरू करेगा?

2. बिना पार्किंग और बिना डायवर्शन के रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे इन अवैध सेंटरों पर सीलिंग की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

3. पालकों (माता-पिता) से अपील: अपने बच्चों को भारी-भरकम फीस देकर भेजने से पहले क्या आपने उस बिल्डिंग में इमरजेंसी एग्जिट या सुरक्षा के इंतजाम देखे हैं?संपादकीय नोट (Editorial Call): ‘युग न्यूज’ स्थानीय प्रशासन से मांग करता है कि लखनऊ जैसी भयावह त्रासदी रायपुर में न दोहराई जाए, इसके लिए तत्काल प्रभाव से शहर के सभी कोचिंग सेंटरों और प्राइवेट लाइब्रेरियों की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों को तुरंत सील किया जाए।

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