विशेष संवाददाता, रायपुर।छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए मानसून की शुरुआत के साथ ही महंगाई का एक बड़ा झटका लगा है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग (State Electricity Regulatory Commission) ने नए वित्तीय वर्ष के लिए बिजली दरों की घोषणा कर दी है। इस नए टैरिफ के मुताबिक, प्रदेश में बिजली की दरें 30 पैसे से लेकर 50 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ा दी गई हैं। आम घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यावसायिक (कमर्शियल) सेक्टर को भी नहीं बख्शा गया है।

कमर्शियल यूजर्स के लिए भी दामों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है।यह नया टैरिफ आगामी 1 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगा, जिसका सीधा असर अगस्त महीने में आने वाले बिजली के बिलों पर दिखाई देगा।
टैरिफ का पूरा गणित: किस पर कितना बढ़ा बोझ?
विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी की गई नई दरों के बाद अलग-अलग श्रेणियों में उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला असर इस प्रकार है:1. घरेलू उपभोक्ता (Domestic Category)मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।बढ़ोतरी की सीमा: खपत के स्लैब के आधार पर 30 पैसे से 50 पैसे प्रति यूनिट का इजाफा किया गया है।असर: जो परिवार हर महीने 200 से 300 यूनिट बिजली की खपत करते हैं, उनके मासिक बिल में ₹100 से ₹150 तक की सीधी बढ़ोतरी होना तय है।
2. व्यावसायिक उपभोक्ता (Commercial Category)छोटे दुकानदारों, शोरूम संचालकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए भी राहत की कोई खबर नहीं है।बढ़ोतरी की सीमा: 20 पैसे से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि।
असर: व्यापारिक लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में आम उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं।क्यों लिया गया बिजली महंगी करने का फैसला?विद्युत कंपनियों (CSPDCL) का पक्ष है कि उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण बताए जा रहे हैं:कोयले और परिवहन की बढ़ती लागत: बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक कोयले की कीमतों और उसकी ढुलाई (Transportation) के खर्च में बढ़ोतरी हुई है।बुनियादी ढांचे का विस्तार: प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए सब-स्टेशनों और लाइनों के आधुनिकीकरण पर भारी खर्च हो रहा है।
कंपनियों का घाटा:
बिजली कंपनियों के संचित घाटे को पाटने और वित्तीय स्थिति को संतुलित करने के लिए दरों में संशोधन को अनिवार्य बताया गया है।उद्योगों और किसानों पर क्या होगा असर?घरेलू और कमर्शियल दरों में बढ़ोतरी के साथ-साथ कयास लगाए जा रहे हैं कि उद्योगों के लिए भी कुछ बदलाव किए गए हैं। हालांकि, कृषि क्षेत्र (किसानों) के लिए राज्य सरकार की रियायती योजनाएं और सब्सिडी पहले की तरह जारी रहने की उम्मीद है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा विपरीत असर न पड़े।जनता में भारी आक्रोश, विपक्ष साध सकता है निशाना1 जुलाई से लागू होने वाले इस फैसले पर आम जनता और व्यापारी संगठनों ने नाराजगी जतानी शुरू कर दी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि भीषण गर्मी के बाद अब जब मानसून आ रहा है, तब बिजली के दाम बढ़ाकर आम आदमी की कमर तोड़ने का काम किया गया है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर आने वाले दिनों में गरमा-गरमी देखने को मिल सकती है।
युग न्यूज की नजर: बिजली दरों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब आम जनता पहले से ही घरेलू बजट को लेकर संघर्ष कर रही है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस बढ़ोतरी के बाद आम उपभोक्ताओं को (जैसे हाफ बिजली बिल योजना या अन्य माध्यमों से) कोई अतिरिक्त राहत देने की घोषणा करती है या नहीं।
ब्यूरो रिपोर्ट, युग न्यूज (रायपुर)।