बस्तर, छत्तीसगढ़: स्वावलंबी भारत अभियान और बस्तर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘इनोवेशन महाकुंभ 1.0’ का उद्देश्य क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें स्वरोजगार की ओर प्रेरित करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से बस्तर के युवाओं को रोजगार ढूंढने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने का संकल्प लिया गया है।
युवाओं की प्रतिभा को निखारने का प्रयास
स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत संयोजक और स्वावलंबी भारत अभियान के प्रांत समन्वयक जगदीश पटेल ने बताया कि बस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद के साये में रहा, जिसके कारण यहाँ के युवाओं की प्रतिभा दबकर रह गई थी। उन्होंने कहा, “नक्सलवाद ने हमारे युवाओं के विकास को बाधित किया था, लेकिन अब बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है। अब समय है कि हम नई ऊर्जा और उत्साह के साथ युवाओं के आर्थिक उन्नयन का मार्ग प्रशस्त करें।”
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और व्यापक सर्वे
इस महाकुंभ की तैयारी के लिए स्वावलंबी भारत अभियान ने बस्तर अंचल के सातों जिलों का दौरा किया और लगभग 8,000 युवाओं का सर्वे किया। इनमें से 2,000 ऐसे युवाओं को चिन्हित किया गया है जो स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
पटेल ने साझा किया कि इस आयोजन में देश भर से:
• IITians
• प्रमुख उद्योगपति
• इनोवेटिव आइडिया विशेषज्ञ शामिल हुए हैं, जो युवाओं को स्टार्टअप, उद्यमिता और नवाचार के गुर सिखाएंगे।
चुनौतियों के बावजूद उज्ज्वल भविष्य की ओर
इंटरव्यू के दौरान जब हाल ही में हुए आईडी (IED) ब्लास्ट और निम्न स्तर की शिक्षा व्यवस्था (जैसे एक ही कमरे में कई कक्षाओं का संचालन) पर सवाल उठाए गए, तो पटेल ने स्वीकार किया कि नक्सलवाद के प्रभाव के कारण जमीनी स्तर तक सुविधाएं पहुँचने में देरी हुई है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से काम कर रही है।
उन्होंने आगे कहा, “हम कब तक पुरानी समस्याओं का रोना रोएंगे? आज एक नया सवेरा हुआ है। विकसित बस्तर, विकसित छत्तीसगढ़ और अंततः विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में बस्तर अब एक अहम भूमिका निभाएगा।”
यह कार्यक्रम बस्तर के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
