रायपुर | छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के नियमों और मानकों को ठेंगे पर रखने वाले अस्पतालों के खिलाफ राज्य नोडल एजेंसी ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के दिशा-निर्देशों का पालन न करने पर प्रदेश के 59 अस्पतालों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए गए हैं।
क्यों हुई यह कार्रवाई?
दरअसल, सभी पंजीकृत अस्पतालों को HEM 2.0 पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट करने और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक का समय दिया गया था। बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद कई अस्पतालों ने इसमें लापरवाही बरती, जिसके बाद जिला स्तर से प्राप्त समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य नोडल एजेंसी ने यह एक्शन लिया है।
कार्रवाई का विवरण: तीन श्रेणियों में बंटे अस्पताल
राज्य नोडल एजेंसी द्वारा की गई कार्रवाई को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है:
1. 21 अस्पताल पूरी तरह निलंबित: ये वे अस्पताल हैं जिन्होंने पोर्टल पर एक बार भी आवेदन प्रस्तुत नहीं किया। इन्हें आगामी आदेश तक सस्पेंड कर दिया गया है।
2. 12 अस्पताल निलंबित (क्वेरी पेंडिंग): इन अस्पतालों ने जानकारी तो दी, लेकिन विभाग द्वारा पूछे गए सवालों (Queries) का जवाब नहीं दिया। क्वेरी पूर्ण होने तक इनका निलंबन जारी रहेगा।
3. 26 अस्पतालों का भुगतान और प्री-ऑथ रोका गया: जिनके दस्तावेज अधूरे पाए गए और जिन्होंने दोबारा आवेदन नहीं किया, उनके पेमेंट और प्री-ऑथराइजेशन पर रोक लगा दी गई है।
प्रमुख अस्पतालों के नाम जो कार्रवाई की जद में आए
• रायपुर के प्रमुख अस्पताल: महादेव हॉस्पिटल, शिवान हॉस्पिटल, सिद्धी विनायक हॉस्पिटल, कालडा नर्सिंग होम, एकता इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ, रावतपुरा सरकार हॉस्पिटल और छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल सहित कई अन्य नाम शामिल हैं।
• अन्य जिले: दुर्ग के एपी सर्जिकल सेंटर, गंगोत्री हॉस्पिटल; बेमेतरा का न्यू आयुष्मान हॉस्पिटल; महासमुंद का सेवा भवन हॉस्पिटल और गरियाबंद का सोमेश्वर हॉस्पिटल भी सूची में हैं।
विभाग की चेतावनी
राज्य नोडल एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई योजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करने के लिए की गई है। एजेंसी ने सभी अस्पतालों से अपील की है कि वे निर्धारित मानकों को पूर्ण करें और समय सीमा के भीतर दस्तावेज अपलोड करें ताकि मरीजों को मिलने वाली सेवाओं में कोई बाधा न आए।
