अंग तस्करी का महाखुलासा: ‘मौत के सौदागर’ बने डॉक्टर, किडनी रैकेट में IMA की पूर्व उपाध्यक्ष समेत 5 गिरफ्तार देखे तस्वीर

By Pallav shrivastav

उत्तर प्रदेश के कानपुर से मानवता को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ के कल्याणपुर इलाके में स्थित निजी अस्पतालों की आड़ में चल रहे एक बड़े ‘किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट’ का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घिनौने खेल में नामी डॉक्टर शामिल थे, जो चंद रुपयों के लालच में इंसानी अंगों का सौदा कर रहे थे।

गरीब की मजबूरी और डॉक्टरों का ‘व्यापार’

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर और मजबूर लोगों को अपना निशाना बनाता था। दावों के मुताबिक, ये डॉक्टर एक किडनी के लिए डोनर को करीब 6 लाख से 10 लाख रुपये का लालच देते थे, जबकि उसी किडनी को जरूरतमंद रईस मरीजों को 80 लाख से 90 लाख रुपये तक में बेचा जा रहा था।

इन अस्पतालों पर गिरी गाज

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त छापेमारी के बाद कानपुर के तीन अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई की गई है:

1. आहूजा हॉस्पिटल (Ahuja Hospital)

2. मेडल लाइफ हॉस्पिटल (Med Life Hospital)

3. प्रिया हॉस्पिटल (Priya Hospital)

बड़े नाम आए सामने

इस मामले में पुलिस ने कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 5 डॉक्टर शामिल हैं। मुख्य आरोपियों में डॉ. प्रीति आहूजा और उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा का नाम शामिल है। बता दें कि डॉ. प्रीति आहूजा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की कानपुर इकाई की पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। इनके अलावा डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. राम प्रकाश और दलाल शिवम को भी हिरासत में लिया गया है।

कैसे हुआ खुलासा?

इस काले कारोबार की पोल तब खुली जब बिहार के एक MBA छात्र ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई। छात्र ने आरोप लगाया कि उससे किडनी का सौदा किया गया, लेकिन उसे तय रकम नहीं दी गई। छात्र की शिकायत पर जब पुलिस ने तफ्तीश शुरू की, तो कड़ियां जुड़ती गईं और एक अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले नेटवर्क का संकेत मिला।

डॉक्टरों को भगवान का रूप माना जाता है, लेकिन कानपुर की इस घटना ने समाज के भरोसे को हिलाकर रख दिया है। प्रशासन अब इन अस्पतालों के लाइसेंस रद्द करने और आरोपियों पर कठोरतम कार्रवाई की तैयारी में है।”
ब्यूरो रिपोर्ट, युग न्यूज़

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