भिलाई/दुर्ग। लौह नगरी भिलाई के हृदय स्थल में आयोजित ‘स्वदेशी मेला 2026’ वर्तमान में केवल एक व्यापारिक आयोजन न रहकर भारतीय परंपरा, कौशल और आत्मनिर्भरता के महाकुंभ के रूप में उभर रहा है। स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित इस मेले में स्थानीय कारीगरों के हस्तशिल्प और स्वदेशी उत्पादों की धूम मची हुई है।
परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम
मेले के भ्रमण के दौरान भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिल रही है। यहाँ कश्मीर से कन्याकुमारी तक के पारंपरिक हस्तशिल्प, मिट्टी के बर्तन, खादी के वस्त्र और जैविक खाद्यों के स्टॉल्स लगाए गए हैं। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन भारतीय कारीगरों की प्रतिभा को एक वैश्विक मंच प्रदान करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
मुख्य आकर्षण:
• हस्तशिल्प और कला: लुप्त हो रही पारंपरिक कलाओं का जीवंत प्रदर्शन।
• स्वदेशी उत्पाद: दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर साज-सज्जा के सामान तक, सब कुछ ‘मेड इन इंडिया’।
• स्थानीय उद्यमिता: भिलाई और दुर्ग के उभरते स्टार्टअप्स और महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी।
• सांस्कृतिक कार्यक्रम: शाम ढलते ही भारतीय लोक कलाओं और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियाँ दर्शकों का मन मोह रही हैं।

स्वदेशी मेला केवल बाजार नहीं, बल्कि हमारे देश के उन गुमनाम नायकों (कारीगरों) के प्रति सम्मान है, जो अपनी उंगलियों के जादू से भारत की पहचान को जीवित रखे हुए हैं।” — मेला समिति प्रवक्ता
आत्मनिर्भरता का संकल्प
मेले में आने वाले आगंतुकों में ‘लोकल के लिए वोकल’ होने का उत्साह साफ देखा जा सकता है। स्वदेशी जागरण मंच का उद्देश्य स्पष्ट है—स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को धरातल पर मजबूत बनाना।
नागरिकों से अपील:
मेला आयोजकों ने दुर्ग-भिलाई के नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में परिवार सहित आएँ, स्वदेशी अपनाएँ और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपना योगदान दें।