रायपुर। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पंजीकरण और उपचार व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इन नए विभागीय नियमों ने विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर के निजी अस्पतालों की चिंता बढ़ा दी है।
मुख्य नियम और समय सीमा
नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी अस्पताल को आयुष्मान योजना के तहत मान्यता प्राप्त करने के लिए प्रति 20 बेड पर कम से कम तीन MBBS डॉक्टरों की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा।
• अंतिम तिथि: सभी निजी अस्पतालों को ‘अस्पताल एम्पैनलमेंट मॉड्यूल’ (HEM 2.0) पोर्टल पर अपनी जानकारी 31 जनवरी 2026 तक अपडेट करनी होगी।
• इसी जानकारी के आधार पर अस्पतालों को भविष्य में योजना के लिए पात्र माना जाएगा।
अस्पताल संचालकों की चुनौतियां
निजी अस्पताल बोर्ड और आईएमए (IMA) के प्रतिनिधियों ने इन नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई है। संचालकों का कहना है कि:
1. बढ़ता खर्च: तीन-तीन डॉक्टरों की व्यवस्था करने से अस्पताल के संचालन का खर्च काफी बढ़ जाएगा, जबकि उस तुलना में आय कम है।
2. व्यावहारिक समस्या: छोटे अस्पतालों के लिए इतने डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना काफी कठिन और अव्यावहारिक है।
3. योजना से बाहर करने का प्रयास: डॉ. राकेश गुप्ता (अध्यक्ष, एचपीसीआई) का मानना है कि ये नियम छोटे अस्पतालों को योजना से बाहर करने का एक प्रयास प्रतीत होते हैं।
बकाया भुगतान का मुद्दा और हड़ताल की चेतावनी
नियमों के साथ-साथ पिछले एक साल से रुके हुए बकाया भुगतान (करीब 600 करोड़ रुपये) ने भी स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। भुगतान न होने के विरोध में कई अस्पतालों ने सूचना जारी की है कि वे 30 जनवरी को आयुष्मान योजना के तहत उपचार बंद रखेंगे।
सरकार का पक्ष
विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इन नए नियमों से अस्पतालों द्वारा की जाने वाली मनमानी पर रोक लगेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
