छत्तीसगढ़ के इस जंगल में मिला प्राचीन शिव मंदिर, दीवारे टूटी मूर्तियां खंडित

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छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से करीब 70 किमी दूर चिल्फी से आगे वनांचल ग्राम बेंदा है, जिसे पहले राजबेंदा के नाम से जाना जाता था. यहां राजा के निवास करने की जानकारी मिली है.

 

साथ ही मंदिर का निर्माण भी राजा द्वारा करवाया गया है. हांलाकि इसकी सही सही जानकारी किसी के पास नहीं है, लेकिन अब ये पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गया. बचे स्तम्भ, परकोटे, खंभों में नक्काशी सहित अन्य चित्रकारी आज भी अपनी कहानी बयां कर रही हैं. स्थानीय युवक मूलचंद कहते हैं कि इस इलाके में मंदिर की मान्यता काफी है. स्थाीनय निवासी गणेश राम कहते हैं कि आस-पास के इलाके के लोग मंदिर में पूजा करने पहुंचते थे.

 

 

इतिहास व पुरातत्व के जानकार आदित्या श्रीवास्तव का कहना है कि इस ये मंदिर भी प्राचीन कालीन है, लेकिन वर्तमान में यह पूरी तरह से ध्वंसाशेष ही रह गया है. लंबे से यह मंदिर परिसर इसी अवस्था में है. पहले बताते है कि कई दुर्लभ मुर्तियां भी थीं, जो अब वहां दिखाई नहीं देती हैं. सबसे खास बात उस परिसर में एक गणेश जी की प्रतिमा भी है. जो मूसक पर सवार हैं. ऐसी प्रतिमा बहुत कम देखने को मिलती है.

 

भाेरमदेव से जुड़े तार

 

स्थानीय निवासी इसे कवर्धा के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर के समकालीन तोमानते ही हैं. साथ ही इसे भोरमदेव मंदिर से तुलना भी करते हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले भोरमदेव मंदिर का निर्माण यहीं होना था, लेकिन किसी कारणवश नहीं हो पाया. यह बेंदा के बजाय भोरमदेव में हुआ. जिस पर पुरातत्व विशेज्ञय आदित्य श्रीवास्तव का मानन है कि भोरमदेव की जगह मंदिर का इस जगह पर निर्माण की कोई जानकारी नहीं है. लोग भले ही कहते हों, लेकिन वर्तमान में जो भोरमदेव मंदिर बना है, वह उस काल के हिसाब से अनुकूल था. बेंदा नामक जगह इसके ठीक विपरीत है.