कोरोना से बचाव में खूब खाईं विटामिन-सी व डी की दवाएं, जानिए- अब क्या-क्या हो रहे साइड इफेक्ट

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कोरोना काल में प्रतिरक्षण प्रणाली (इम्यून सिस्टम) मजबूत करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते रहे। पौष्टिक आहार के साथ विटामिन डी और सी की दवाएं मनमाने तरीके से खाईं। अब इन दवाओं का दुष्प्रभाव यानी साइड इफेक्ट दिखने लगा है। कमजोरी, थकान, हाथ-पैर व कमर दर्द और हड्डियों में ऐंठन की समस्या से पीडि़त मरीजों की एलएलआर अस्पताल (हैलट) में संख्या बढ़ी तो जीएसवीएम मेडिकल कालेज के आर्थोपेडिक विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष डा. संजय कुमार के निर्देश पर असिस्टेंट प्रोफेसर डा.फहीम अंसारी ने अध्ययन किया। इसमें पता चला कि मरीजों के खून में विटामिन डी की अधिकता का उल्टा असर होने लगा। अब वह मरीजों को सुझाव दे रहे हैैं कि दवा की जितनी डोज बताई जाए, उतनी ही लें।

 

 

 

कोरोना काल में मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था भी देख चुके डा.फहीम के मुताबिक अब तक सात सौ मरीजों पर अध्ययन किया। सभी के खून में विटामिन डी लेवल, कैल्शियम और फास्फोरस की जांच कराई। यूरिन और एक्सरे की जांच में 500 मरीजों में कोई न कोई समस्या मिली।

 

वजह पता करने पर सामने आई हकीकत : कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन डी और विटामिन सी के सेवन की सलाह डाक्टरों ने दी थी। ऐसे में कोरोना के इलाज के लिए शासन से स्तर से गाइड लाइन जारी कर अस्पताल से लेकर मरीजों के घरों तक दवाओं के पैकेट पहुंचाए गए। संक्रमितों के साथ-साथ उनके स्वजन भी दवाएं खाते रहे। लंबे समय तक विटामिन डी के सेवन से उनके खून में विटामिन के साथ-साथ कैल्शियम का स्तर बढ़ता चला गया। इससे हाइपर विटामिनोसिस डी और हाइपर कैल्शिमिया की समस्या होने लगी।

 

 

अब इन समस्याओं ने घेरा : खून में विटामिन डी का स्तर बढऩे से हड्डी में कमजोरी, किडनी में पथरी, किडनी क्षतिग्रस्त और लिवर प्रभावित हुआ है। लिवर प्रभावित होने से पेट संबंधी समस्याएं भी होने लगी हैं।

 

-विटामिन डी की दवाएं बिना जांच कराए नहीं खानी चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन करने से खून में कैल्शियम व विटामिन डी की मात्रा बढ़ जाती है। इससे हड्डी में क्षरण यानी बोन लास की समस्या भी होने लगती है। पोस्ट कोविड मरीजों पर अध्ययन किया है। उन्हें कोरोना से उबरने के बाद किडनी व लिवर से जुड़ी समस्याएं शुरू हो गईं हैं। -डा. फहीम अंसारी, असिस्टेंट प्रोफेसर, आर्थोपेडिक विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कालेज

(सौजन्य daink जागरण)