नया रायपुर निमोरा में जमीन दिलाने के नाम पर सरकारी कर्मचारियों से करोड़ों की ठगी “आसरा विहार” नाम से था प्रोजेक्ट। पैसा वापस मांगने गए लोगों पर कुत्ते तक छोड़े।

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छोटी किश्तों में नवा रायपुर अटल नगर के पास सस्ती जमीन दिलाने के नाम पर सरकारी कर्मचारियों को ठगे जाने का बड़ा मामला सामने आया है। ठगी का शिकार ऐसे कर्मचारी हुए हैं जो या तो रिटायर हो चुके हैं या कुछ सालों में रिटायर हो जाएंगे। कथित कालोनाइजर के झांसे में आकर पीड़ितों ने पीएफ खाते से लाखों रुपए प्लॉट में निवेश कर दिए, लेकिन इन्हें न तो जमीन मिली और न ही पैसा। अब पीड़ित थाना और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

हाथों पर रसीदें और जमीन की रजिस्ट्री लेकर बैठे ये बुजुर्ग गार्डन में सैर करने नहीं बल्कि अपने साथ ही धोखाधड़ी की कहानी बताने आए हैं। मामला रायपुर का है जहां किश्तों पर प्लॉट दिलाने का झांसा देकर एक कॉलोनाइजर ने इनकी खून पसीने की कमाई डकार ली। पीड़ितों का आरोप है कि विजेंद्र भटनागर नाम के कॉलोनाइजर ने नवा रायपुर के पास निमोरा गांव में सस्ती और अच्छी जमीन दिलाने के नाम पर साल 2007 से किश्तें जमा कराईं। पीड़ितों का कहना है की भटनागर के प्रोजेक्ट में निवेश करने वालों की संख्या 15 सौ से पार पहुंच चुकी थी। लेकिन जब जमीन सौंपने की बारी आई है, तो पिछले साल से न तो कॉलोनाइजर का पता है और न ही उसके कर्मचारियों का। ठगे गए लोगों में सबसे ज्यादा लोग शिक्षा विभाग के कर्मचारी हैं जो कुछ साल में ही रिटायर होने वाले हैं।

 

पीड़ितों का कहना है की कॉलोनाइजर विजेंद्र भटनागर ने आसरा विहार, आसरा सिटी नाम के प्रोजेक्ट के ब्राउजर दिखाए थे जिसमें हेल्थ क्लब, स्विमिंग पूल, गार्डन वाली कॉलोनी में प्लॉट देने का वादा किया। जमीन देखकर सभी लोग उसके झांसे में आ गए और लाखों रूपए बुकिंग अमाउंट भी दे डाला। पीड़ित लोग हाथ में रसीद लिए कभी थाने तो कभी कलेक्ट्रेट के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने दबाव डाला तो कॉलोनाइजर ने रजिस्ट्री के पुराने समय से जमीन की मैन्युल रजिस्ट्री तो करा दी। लेकिन सालों तक न तो जमीन दिखाई और न ही कब्जा दिया। थक हार कर अब पीड़ित कर्मचारियों ने नवा रायपुर के थाने में कॉलोनाइजर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।