खाने का तेल सस्ता करने के लिए सरकार ने दिया ये सख्त आदेश, अब होगी सीधी कार्रवाई, जानिए पूरा मामला

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त्योहारों पर खाने के तेलों की कीमतों पर लगाम के लिए उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय एक्शन में आ गया है. मिली जानकारी के मुताबिक उपभोक्ता मंत्रालय ने सभी राज्यों को चिट्ठी व्यापारियों को हर हफ्ते अपना स्टॉक घोषित करने की मांग की है. अब दलहन की तरह तिलहन के स्टॉक और दाम को सरकार चेक करवाएगी. राज्यों के आपूर्ति अधिकारी लिमिट नहीं बल्कि स्टॉक चेक करेंगे और रेट के बारे में रिव्यू करेंगे. आपको बता दें कि खाद्य तेलों की कीमतों में पिछले एक साल में बेतहासा वृद्धि हुई है और कुछ तेलों के मामले में कीमत वृद्धि 50 फीसदी से 70 फीसदी तक हुई है. सरकार द्वारा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आयात बढ़ाने के तमाम कदम उठाये गये हैं.

सरकार ने उठाए सख्त कदम

सरकार का कहना है कि खाद्य तेलों के आयात पर सीमा शुल्क दरों को कम करने के बावजूद कीमतों में कमी नहीं हो रही है और उसकी असली वजह जमाखोरी है.

 

 

इसलिए जमाखोरी पर अंकुश के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) के तहत कारोबारियों, व्यापारियों, प्रसंस्करण करने वाली इकाइयों को अपने स्टॉक का खुलासा करना होगा. यह काम राज्य सरकारें करेंगी और उनको आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह अधिकार दे दिया गया है.

 

इस पत्र में कहा गया है कि मुझे यह निर्देश दिया गया है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सभी आवश्यक वस्तुओं की उचित कीमत पर आम आदमी को उपलब्धता कराने का प्रावधान है. लेकिन पिछले दिनों सरकार द्वारा खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कमी के फैसले के बावजूद इनकी कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इसकी वजह स्टॉकिस्टों द्वारा की गई जमाखोरी हो सकती है.

 

क्यों लिया ये फैसला

आयातित खाद्य तेलों के साथ ही घरेलू उत्पादित सरसों तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रबी सीजन (2021-22) के लिए के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4650 रुपये प्रति क्विटंल था लेकिन इस समय बाजार में सरसों की कीमतें 9500 रुपये प्रति क्विटंल तक पहुंच गई हैं.

 

इसके चलते सरसों तेल के कीमतों में वृद्धि जारी रहने की संभावना बनी हुई है. फूड सेफ्टी स्टेंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की एक अधिसूचना के जरिये अब सरसों तेल में दूसरे खाद्य तेलों की ब्लैंडिंग बंद कर दी गई है. इसके चलते भी सरसों की मांग तेज हुई है.

 

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है कि इसकी कोई भी जरूरत नहीं है. क्योंकि भारत में खाद्य तेलों का पर्याप्त उत्पादन ही नहीं है. हमारी विदेशी तेलों पर निर्भरता है इतना दाम पर कौन होल्डिंग कर सकता है. व्यापारियों के यहां स्टॉक लिमिट और रेट चेक करने से इंस्पेक्टर राज और भ्रष्टाचार बढ़ेगा.

 

अब क्या होगा

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की इकोनॉमिक एडवाइजर ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित क्षेत्रों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को 8 सितंबर, 2021 को लिखे एक पत्र में यह कदम उठाने के लिए कहा है.

 

कुछ माह पहले ही दालों की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए इसी कानून का सहारा लेकर सरकार ने स्टॉक लिमिट लागू की थी. ने सभी राज्यों को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में खाद्य तेलों की जमाखोरी रोकने की मांग की है. सभी व्यापारियों को अपना स्टॉक घोषित करना होगा. मंत्रालय की वेबसाइट पर स्टॉक घोषित करना होगा.

 

इसके अलावा हर हफ्ते व्यापारियों को स्टॉक की जानकारी देनी होगी. जानकारी छिपाने पर व्यापारियों पर कार्रवाई होगी.

एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत एक्शन होगा. इंपोर्ट ड्यूटी घटाने के बावजूद खाद्य तेलों के दाम बढ़े