करोना की तीसरी लहर से पहले ही देश के बच्चे खतरे में

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कोरोना की तीसरी लहर भी बच्चों के लिए खतरनाक बताई जा रही है. उधर, उत्तराखंड में बच्चों में बढ़ते कोरोना संक्रमण ने अब चिंताएं और ज्यादा बढ़ा दी हैं. मई महीना जहां मौतों के लिहाज से खतरनाक साबित हो रहा है वहीं 15 दिनों में 1700 बच्चे कोरोना की चपेट में आए हैं. अभी तक राज्य में 5 हजार से अधिक बच्चे कोरोना की चपेट में आ चुके हैं.

 

 

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने केंद्र को चेतावनी दी है। NCPCR ने कहा कि तीसरी लहर का बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। ऐसे में सरकार को बच्चों के लिए स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना चाहिए ताकि केसों और मौतों पर नियंत्रण पाया जा सके।

 

इस बीच कर्नाटक से खबर है कि वहां 2 महीनों के भीतर 9 साल से छोटे 40 हजार बच्चे संक्रमित हो गए हैं। 18 मार्च से 18 मई के बीच 10 से 19 साल के बीच के एक लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हुए। हालांकि, बच्चों की मौतों के मामले 18 मार्च तक 28 थे। जबकि मार्च से 18 मई तक 15 बच्चों की जान संक्रमण से गई।

 

तीसरी लहर में बच्चों को लेकर NCPCR ने जाहिर की चिंता

NCPCR ने पिछले हफ्ते स्वास्थ्य मंत्रालय, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) को चिट्ठी लिखी थी। कहा था कि जो आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं, उन्हें लेकर तैयारियां पूरी कर लें। NCPCR ने गुरुवार को सभी राज्यों को भी खत लिखा था और जानकारी मांगी थी कि उनके यहां बच्चों के कोरोना संक्रमण के इलाज की क्या व्यवस्थाएं हैं।

 

एंबुलेंस और स्वास्थ्य फैसेलिटी को बच्चों के लिए तैयार करें- NCPCR

आयोग ने कहा था कि मैटरनिटी में जन्मे बच्चे की देखभाल के लिए अभी गाइडलाइंस हैं। अब निओनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (नवजातों का ICU) और चिल्ड्रेंन इमरजेंसी ट्रांसपोर्ट सर्विस को केवल निओनेटल केस और बच्चोें के लिए खासतौर पर तैयार करने की जरूरत है। बच्चों के लिए एंबुलेंस और ट्रांसपोर्ट वाहनों के संबंध में गाइडलाइन जारी किए जाने की विशेष जरूरत है।

 

ICMR ने कहा कि अभी गाइडलाइन जारी होंगी तो बच्चों के लिए इस तरह के वेंटिलेटर और इंक्यूबेटर्स से लैस एंबुलेंस तैयार हो सकेंगी और तीसरी लहर के लिए हम तैयार हो सकेंगे।

 

बच्चों के लिए कोरोना गाइडलाइंस

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी बड़ी संख्या में बच्चे संक्रमित हो रहे हैं। इसको लेकर हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ज्यादातर बच्चों की देखभाल और इलाज घर पर ही किया जा सकता है। मंत्रालय ने बच्चों में कोरोना के लक्षण होने या कोरोना पॉजिटिव होने पर उनकी देखभाल के लिए गाइडलाइन जारी की है।

 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा है कि ” कोरोना से संक्रमित ज्यादातर बच्चे बिना लक्षण (asymptomatic) वाले या बेहद कम हल्के लक्षण वाले (mildly symptomatic) होते हैं।

 

Asymptomatic यानी बिना लक्षण वाले बच्चों की देखभाल

 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बिना लक्षण वाले कोरोना पॉजिटिव बच्चों की भी घर पर ही देखभाल की जा सकती है। ऐसे बच्चों की पहचान तभी हो पाती है जब उनके परिवार में किसी के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद सभी की जांच की जाती है।

ऐसे बच्चों में कुछ दिनों बाद गले में खराश, नाक बहना, सांस लेने में परेशानी के बिना खांसी हो सकती है। कुछ बच्चों का पेट भी खराब हो सकता है।

इन बच्चों को घर में आइसोलेट करके लक्षणों के आधार पर उनका इलाज किया जाता है। ऐसे बच्चों को बुखार आने पर डॉक्टर की सलाह पर पेरासिटामोल दिया जा सकता है।

बिना लक्षण वाले बच्चों के ऑक्सीजन लेवल पर ऑक्सीमीटर से लगातार निगाह रखें। यदि ऑक्सीजन का स्तर 94% से कम होने लगे तो डॉक्टर की सलाह लें।

Congenital heart disease यानी जन्म से दिल की बीमारी, chronic lung disease यानी लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी, chronic organ dysfunction यानी किसी भी अंग के काम न करना और मोटापा जैसी बीमारियों ग्रसित बच्चों की भी डॉक्टरी सलाह से घर पर देखभाल की जा सकती है।