एक अप्रैल से इन बैंकों का हो रहा है विलय, अगर आपका भी है इन बैंकों में खाता तो जानिए क्या होगा असर

एक अप्रैल से आठ सरकारी बैंकों का विलय होने जा रहा है। जिन आठ बैंकों का विलय होने जा रहा है, उनमें विजया बैंक (Vijaya Bank), कॉरपोरेशन बैंक (Corporation Bank), आंध्र बैंक (Andhra Bank), सिंडिकेट बैंक (Syndicate Bank), ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (Oriental Bank of Commerce), यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (United Bank of India), इलाहाबाद बैंक (Allahabad Bank) और देना बैंक (Dena Bank) शामिल है।

 

अगर आप इनमें से किसी बैंक के ग्राहक हैं, तो आपको कुछ जरूरी काम करने की आवश्यकता होगी। विलय के बाद संबंधित बैंक के आधार पर खाता संख्या, चेकबुक, कार्ड, भारतीय वित्तीय प्रणाली कोड (IFSC) और एमआईसीआर कोड (MICR) में बदलाव हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं।

चेकबुक

जिन बैंकों का विलय हो रहा है, उनकी चेकबुक एक अप्रैल से मान्य नहीं होगी। आपको एंकर बैंक (जिसमें विलय हो रहा है) से नई चेकबुक इश्यू करवानी होगी। उदाहरण के तौर पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की चेकबुक 31 मार्च तक ही वैध होगी। इन दोनों बैंकों का विलय पंजाब नेशनल बैंक में हो रहा है। ऐसे में इन दोनों बैंकों के ग्राहकों को पीएनबी (PNB) से नई चेकबुक इश्यू करवानी होगी।

 

कुछ बैंक ग्राहकों को चेकबुक के मामले में कुछ समय के लिए राहत भी दे सकते हैं, क्योंकि आरबीआई (RBI) ने कुछ बैंकों को अगली एक या दो तिमाही के लिए पुरानी चेकबुक्स को जारी रखने की अनुमति दी है। उदाहरण के तौर पर, सिंडिकेट बैंक के ग्राहक अपनी चेकबुक्स का उपयोग 30 जून तक कर सकते हैं।

आप कब तक पुरानी चेकबुक्स का उपयोग कर सकते हैं, यह जानने के लिए आपको अपने बैंक द्वारा दी जाने वाली सूचनाओं से अवगत रहना होगा। हालांकि, यदि आपने आगे की तारीख के चेक दिए हैं, तो आपको नई चेकबुक मिलते ही उन्हें नए चेक से बदलना होगा।

अगर संभव हो, तो आपको विलय से पहले अपने खाते का अपडेटेड स्टेटमेंट ले लेना चाहिए अर्थात पासबुक प्रिंट करा लेनी चाहिए और उसे अपने पास सुरक्षित रख लेना चाहिए।

धन का लेनदेन

विलय से कुछ बैंक को आईएफएससी और एमआईसीआर कोड बदल जाएगा। वहीं कुछ बैंकों का अपरिवर्तित रहेगा। कुछ बैंकों में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की तरह खाता संख्या नहीं बदली है, केवल IFSC कोड बदल गया है। हर बैंक का माइग्रेशन अलग होता है। आपको अपने बैंक से संपर्क कर यह पता लगाना होगा कि क्या बदलेगा और क्या नहीं बदलेगा। उसके अनुसार ही आपको लोन और जीवन बीमा और म्यूचुअल फंड निवेश जैसे अन्य भुगतान के लिए अपने ईसीएस (ECS) निर्देशों को बदलने की आवश्यकता होगी।

 

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