प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में जानिए क्या होती है करोना से मरने वालों के लाशों की हालत।

IMG-20210828-WA0014
IMG-20210828-WA0016
IMG-20210828-WA0017
C1FECB16-374E-4F72-88E4-3B97BA9DA4B7
previous arrow
next arrow

प्रदेश के सबसे बड़े कहे जाने वाले डॉक्टर भीमराव आंबेडकर अस्पताल में कोरोना से मरने वालों लाशों की हालत ऐसी होती है जिसे देखकर आप हैरान हो जाएंगे। आंबेडकर अस्पताल मर्च्युरी के बाहर गलियारे में कोरोना से मरने वालों की लाशों का मेला लगा दिया गया। हालांकि सभी शव पूरी तरह सुरक्षित करके ही रखे गए लेकिन इसकी वैकल्पिक व्यवस्था भी तो की जा सकती थी ताकि इस तरह सहमा देने वाली स्थिति उत्पन्न न हो।

 



बता दें कि मेकाहारा की मर्च्युरी के बाहर गलियारे में एक साथ लाशों का ढेर लगा देखकर लोग हैरान हो गए कि आखिर क्या वजह है जो अस्पताल परिसर में खुले में इस तरह लाशों को छोड़ दिया गया। वैसे सभी लाशें कवर्ड की गई थी लेकिन जिस तरह से खुले में इन्हें रखा गया, उसे देख कर लोगों में दहशत फैल गई।

इस पूरे मामले को लेकर जब आंबेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर विनीत जैन से जानकारी चाही गई तो उनका कहना था कि बॉडी को सेनेटाइज करने के बाद नमी आ जाती है, उसे सुखाने के लिए कुछ देर बाहर रखने के बाद बॉडी को फिर अंदर रखा जाता है। संक्रमण का कोई खतरा नहीं है। बॉडी पूरी तरह सुरक्षित तरीके से नमी दूर करने के लिए रखी जाती है। संक्रमण का खतरा क्यों नहीं है, इस बारे में उनका कहना था कि बॉडी न तो सांस ले रही है और न छोड़ रही है। अब सवाल यह है कि अगर कोरोना के कारण मरने वाले से संक्रमण का कोई खतरा इसलिए नहीं है कि मृतक सांस नहीं ले सकता और न ही छोड़ सकता तो फिर कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को उनसे दूर रखने का औचित्य क्या है?